मेरठ विश्वविद्यालय में शंकराचार्य परिषद व भाग्योदय फाउण्डेशन की हिन्दू पंचायत सम्पन्न

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मेरठ। यहाँ मेरठ विश्वविद्यालय परिसर में स्थित वृहस्पति भवन के सभागार में आज शंकराचार्य परिषद और भाग्योदय फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिन्दू पंचायत’ सम्पन्न हुई। भारत को सनातनी वैदिक राष्ट्र घोषित करने की संकल्पपूर्ण माँग इस पंचायत में उठी। ज्ञातब्य है कि हिन्दू रिपब्लिक ऑफ हिन्दुस्थान के लिए हिन्दू पंचायतों की श्रृंखला इन दिनों समूचे देश में चलायी जा रही है।

पंचायत सभा की अध्यक्षता करते हुए शंकराचार्य परिषद के अध्यक्ष श्री स्वामी आनन्द स्वरूप जी महाराज ने कहा कि आज का समय एक ऐसा दौर है जब हम अपने हक को, अपने अधिकार को ले सकते हैं, माँग सकते हैं, छीन सकते हैं। भारत 1947 में आजाद हुआ, वह सफलता सबकी एकता से ही सम्भव हो सकी थी। एक दुर्भाग्यशाली मांग के चलते राष्ट्र का विभाजन हो गया। बाद में सिक्खों को हमसे अलग करने का असफल प्रयास किए गया। उसके बाद बौद्धों को हमसे अलग करने के प्रयत्न हुए। जैनियों को हिन्दुओं से तोड़ने का प्रयास हुआ। यह षड़यन्त्र लगातार चल रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमान और हम सब हिन्दू समग्र रूप से एक साथ रह रहे थे। सन् 1947 में आजादी के समय इस्लाम के नाम पर एक नया देश बना, उसका नाम हुआ ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान’। एक (1) में से जीरो (0) निकल गया। एक और जीरो मिलकर दस बने थे, जब जीरो निकल गया तब एक बचा। जो जीरो निकला वह रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान था। एक जो बच गया वह हिन्दू रिपब्लिक ऑफ हिंदुस्थान है।

1857 के परमवीर हुतात्मा मंगल पाण्डेय के कुटुम्बी प्रपौत्र स्वामी आनन्द स्वरूप ने कहा कि आपको अन्धकार में रखकर संविधान में उपबंध बनाए गए। सन् 1976 की वह काली रात जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश के संविधान को रौंदते हुए उसमें 42वां संशोधन करके धर्म निरपेक्ष या पंथ निरपेक्ष राष्ट्र का शब्द जोड़ दिया गया। उसकी आड़ में आज भी मुस्लिम तुष्टिकरण, ईसाई तुष्टिकरण हो रहा है। तुष्टिकरण करने वाले जितने भी वामपंथी हैं वे हिन्दू विरोधी हैं। यह बात आज देशवासियों की समझ में आ चुकी है इसलिए अब वह विपरीत परिस्थिति अनुकूल हुई हैं। उन्होंने कहा- आइए हम सब मिलकर एक हिन्दू राष्ट्र, वैदिक राष्ट्र, सनातन वैदिक राष्ट्र, हिन्दू रिपब्लिक ऑफ हिंदुस्थान का निर्माण करें। श्री स्वामी जी ने सभी को एक साथ खड़े होकर इस अभियान में जुटने को कहा और भारत सरकार से व्यापक राष्ट्रहित के इस विषय पर गम्भीर होने का अनुरोध किया।

भाग्योदय फाउण्डेशन केे अध्यक्ष श्री राम महेश मिश्र के मुख्य संयोजन में सम्पन्न पंचायत सभा में बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार रखते हुए शंकराचार्य परिषद के राष्ट्रीय पार्षद डाॅ. विद्या सागर उपाध्याय ने कहा कि निखिल विश्व मे एकमात्र धर्म सनातन धर्म है ,शेष पंथ मजहब या सम्प्रदाय हैं और सनातन धर्म ही ऐसा धर्म है जो वसुधैव कुटुम्बकम व सर्वे भवन्तु सुखिनः की विचारधारा का पोषक है, जिससे सच्चे अर्थों में पंथनिरपेक्ष समाज स्थापित हो सकता है अन्यथा कथित पंथनिरपेक्ष लोगों ने तो हमेशा ही हिन्दू विचारधारा पर प्रहार करने का ही कार्य किया है, इसलिए विश्व के कल्याण हेतु भारत का हिन्दू राष्ट्र होना एक अपरिहार्य आवश्यकता बन गयी है। चूँकि हिन्दू समाज ने कभी धर्म के प्रसार पर विशेष ध्यान नहीं दिया इसका लाभ उठाकर विधर्मियों ने अफगानिस्तान, म्यांमार, भूटान, ª नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश को हमसे अलग कियाि और वर्तमान में कश्मीर सहित दर्जनों ऐसे क्षेत्र है जो हैं तो भारत मे तो हैं लेकिन लगातार अलग होने का प्रयास कर रहे है। ऐसे परिवेश में शंकराचार्य परिषद और भाग्योदय फाउण्डेशन के संयुक्त प्रयास से हिन्दू रिपब्लिक ऑफ हिन्दुस्थान की स्थापना हेतु सम्पूर्ण भारतवर्ष में निरंतर आयोजित की जा रही हिन्दू पंचायतें निश्चित रूप से हिन्दू राष्ट्र का मार्ग प्रशस्त करेंगी।

सिरमौर-हिमाचल से आए जूना अखाड़ा के युवा सन्त श्री स्वामी धनेश्वर गिरि जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि हमारा राष्ट्र प्राचीन काल से ही शान्ति व बन्धुत्व को मानता रहा है। 12वीं शताब्दी से पहले का भारत पूर्ण रूप से हिन्दू राष्ट्र था। यहाँ कोई दूसरा धर्म व पंथ नहीं था। उस समय हमारे देश की भौगोलिक स्थिति बहुत बड़ी थी। मध्यकाल में यहाँ बहुत से बाहरी लोग आए और हमारी अहिंसात्मक व शान्तिप्रिय विचारधारा का अनुचित लाभ उठाया। अपने धर्म व सम्प्रदायों को स्थापित करने के लिए हमारे हिन्दुओं के साथ अमानवीय तरीके से व्यवहार किया गया। हमारे बहुत सारे हिन्दूू योद्धा अपने धर्म को बचाये रखने के लिए इनकी यातनाओं को सहते हुए शहीद हो गए। जो लोग कमजोर और डरपोक थे उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया, यह सोचकर कि कभी कोई ऐसा समय आएगा जब हमारा राष्ट्र हिन्दुत्व की ज्वाला को फौलाद बना देगा। तब हम भी अपने धर्म में सुरक्षित वापस लौट लेंगे। उन्होंने कहा कि अब वह समय आ गया है। उन्होंने कहा कि आज लोग अपने असली धर्म को पहचान रहे हैं। भ्रम मिट रहे हंै और सनातन धर्म पुनः स्थापित हो रहा है। आज पूरा विश्व सनातन हिन्दुत्व को सर्वोपरि मान रहा है। हमारे पूर्वजों ने अपनी तपस्या व योग साधनाओं से हमें इतना कुछ दिया है कि हम इस धरा पर पूरे विश्व की मानवजाति पर सनातन हिन्दुत्व की छाप छोड़ सकते हैं।

भाग्योदय फाउण्डेशन नयी दिल्ली के अध्यक्ष व संस्थापक श्री राम महेश मिश्र ने कहा कि. हमारे ऋषि राष्ट्र भारतवर्ष में बदलाव सदा से ही अध्यात्मपुरुषों ने किए हैं। उन्होेने मगध के आचार्य चाणक्य, विजयनगर के आचार्य विद्यानन्द सरस्वती, महात्मा दयानन्द सरस्वती, आचार्य श्रीराम शर्मा आदि का जिक्र किया और कहा कि इन आचार्यों ने अपने समय में राष्ट्र की दशा व दिशा को बदल दिया था। उन्होेने कहा कि आज वह इतिहास दोहराया जा रहा है और यह अभियान राष्ट्रव्यापी बनता चला जा रहा है। श्री मिश्र ने एकजुट व सशक्त भारत की पुर्नस्थापना का विश्वास व्यक्त किया। इस मौके पर गीता भारद्वाज के वीररस से गीतों से सभागार गूंज उठा। शंकराचार्य परिषद सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के दीपक कुमार व उनकी टीम ने संस्कृति संवर्द्धन का अनूठा वातावरण विश्वविद्यालय परिसर में बना दिया।

पंचायत सभा का समापन भारतीय दलित विकास संस्थान के अध्यक्ष डाॅ. चरण सिंह लिसाड़ी के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश का दलित समाज अब स्वयं को दलित न कहकर शिल्पी अर्थात ‘राष्ट्र निर्माता’ नाम से सम्बोधित करे। इससे हिन्दुस्थान में सामाजिक समरसता का भाव बढ़ेगा। भारत का 40 करोड़ अनुसूचित जाति व जनजाति समाज हिन्दू है और हिन्दू होने पर हमें गर्व है। डॉक्टर लिसाड़ी ने राष्ट्र के शिल्पी समाज से एकजुट होने और देशहित मेँ हिन्दू समाज को मजबूत बनाने का आव्हान किया। इसके पूर्व चले प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में जिज्ञासुओं के सवालों का समाधान महात्मा आनन्द स्वरूप ने किया। हिन्दू पंचायत कार्यक्रम में भाग्योदय फाउण्डेशन केे कार्यक्रम निदेशक अमित मोहन, विद्याकुलम कैथवाड़ी के संचालक डाॅ. सूरज प्रकाश, भूमि विकास बैंक के चेयरमैन मनोज शास्त्री, युवा लोकसेवी दीपक शर्मा, समाजसेवी प्रयाग दत्त शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. हरीश अग्रवाल,विनोद जाहिदपुर, प्रो हरेंद्र सिंह, जतिन लिसाड़ी, मदन गौतम, राजकुमार सिद्धार्थ, डॉ मनोज जाटव, देवेंद्र तोमर, डी. के. पाल,  गुलशन चैहान, मोनिका आनन्द, रूपाली पाण्डेय, रेनू वधावन .सहित सैंकड़ों गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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