मकर संक्रांति पर गुरू सेवकों ने बाबा गोरखनाथ को लगाया खिचड़ी को भोग

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दिव्य विश्वास, सवांददाता

मेरठ। सदर कैन्ट धर्मपुरी स्थित गोरखनाथ सिद्ध पीठ के सेवक एवं गुरु परिवार के सदस्यों ने गुरुवार को मकर संक्रांति के शुभ अवसर बाबा गोरखनाथ को याद किया। इस अवसर पर खिचड़ी का भोग लगाकर गुरु सेवकों ने बाबा गोरखनाथ की महिमा का गुनगान कर विश्व शांति के लिए गुरु से प्रार्थना की । गुरु सेवक गौरवनाथ ने बताया बाबा गोरखनाथ को मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी क्यों चढ़ाई जाती है इसके पीछे एक पौराणिक कथा है उन्होंने बताया एक बार गुरु गोरखनाथ भिक्षाटन कर रहे थे। भिक्षाटन करते करते वो हिमाचल प्रदेश के जिला कागड़ा जा पहुंचे। यहां वो मशहूर ज्वाला देवी मंदिर में चले गए। यहां पर गोरखनाथ ने अपनी भक्ति से मां को प्रसन्न किया। मां ने गोरखनाथ से प्रसन्न होकर उन्हें भोजन के लिए निमंत्रण दिया। उनके लिए कई तरह के भोजन परोसे गए। लेकिन उन्होंने खाना ग्रहण करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें भिक्षा में प्राप्त चावल-दाल से बना भोजन ही ग्रहण करना है। बाबा गोरखनाथ ने देवी से कहा कि उनका भोजन बनाने के लिए पानी गर्म करें। यह कहकर वो भिक्षाटन के लिए निकल गए। फिर वो भिक्षा मांगते हुए गोरखपुर के पास राप्ती और रोहिणी नदी के संगम पर पहुंच गए। यहां उन्होंने अपना अक्षय पात्र रख दिया। तथा वो साधन में लीन हो गए। इस दौरान मकर संक्रांति का पर्व आया। लोगों ने बाबा के पात्र में चावल और दाल रख दी। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि वो पात्र भरता नहीं था। हर किसी ने उसे चमत्कार माना और उनकी पूजा शुरू कर दी। तब से गोरखनाथ वहीं के होकर रह गए। गोरखपुर का नाम उन्हीं के नाम पर पड़ा। इसके बाद से ही हर संक्रांति पर बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाई जाती है। कहा जाता है कि आज भी ज्वाला देवी बाबा गोरखनाथ का इंतजार कर रही हैं और उनके इंतजार में भोजन के लिए पानी खौल रहा है।

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