भारतीय समाज में नारी आदर्श व संस्कार की मूर्ति: प्रो० नरेंद्र कुमार तनेजा

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 दिव्य विश्वास, सवांददाता।

मेरठ। भारतीय समाज में नारी आदर्श पर संस्कारों की मूर्ति होती है। नारी के बिना समाज की परिकल्पना करना असंभव है। हमारे इतिहास में अनेक नारियों की वर्णन है जिन्होंने समाज को नई दिशा देने का काम किया है।  जिस समाज में समानता के लिए कानून की आवश्यक्ता पड़े वो समाज एक सभ्य और विकसीत समाज नहीं हो सकता। भारतीय समाज में नारी के समानता हेतु आर्थिक सुदृढ़ता महत्वपूर्ण है जिसके लिये महिलाओं का शिक्षित एवं रोजगार में संलग्न होना जरूरी है। यह बात माननीय चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति ने विधि अध्ययन संस्थान, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर, मेरठ में विधिक सेवा केन्द्र द्वारा  बालिकाओं के जन्म एवं शिक्षा का अधिकार विषय पर आयोजित सेमिनार के दौरान कही।

नियमों का हो कठोरता से पालन: ऐ.के. तिवारी

मुख्य वक्ता ऐ॰के॰ तिवारी (सेवानिवृत) जिला जज बांका बिहार रहे। जिन्होंने प्रीनेटल डाॅयग्नोस्टिक अधि॰ के प्रावधानों का विशलेषण किया और कहा की इसका कठोर अनुपालन अति आवश्यक है। नारी सशक्तिकरण के लिए संविधान में अनेक प्रावधान दिए गए है। केवल जानकारी के अभाव में वह इसका पालन नहीं कर पाती हैं। इसीलिए अधिकारों के विषय में नारी का जागरूक होना बहुत ही आवश्यक है। जिस दिन नारी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गई तो वर्तमान में नारियों पर जो अत्याचार होते हैं वह समाप्त हो जाएंगे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री कुलदीप सिंह ने किशोर अपचारिकता अधि॰ और विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यशैली पर अपने विचार प्रस्तुत किये ।

कार्यक्रम की रूपरेखा एवं विषय पर डा. कुसुमावति ने अवगत कराया तथा डा.विकास कुमार नोडल अधिकारी ने गत शैक्षणिक वर्ष की विधिक सेवा केन्द्र की आख्या प्रस्तुत की। संचालन डा.अपेक्षा चौधरी ने किया तथा श्रीमति सुदेशना ( समन्वयक विधिक सेवा केन्द्र) ने अतिथियों का परीचय कराया और अंत में धन्यवाद संस्थान के समन्वयक डा. विवेक कुमार ने कहा की हमें बेटियों की दशा सुधारने हेतु अपने निकट सम्पर्क और समाज के लिये कार्य करना होगा। साथ ही कार्यक्रम में डा. धनपाल, डा.महिपाल, डा.सुशील कुमार शर्मा, डा.रौनक खान, डा.मीनाक्षी, शेख अरशद, अपूर्व मित्तल, मितेन्द्र कुमार गुप्ता, तथा संस्थान के छात्र-छात्राऐं भी उपस्थित रहे।

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