भारत में सनातन काल से रही है जैविक कृषि की परम्परा

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दिव्य विश्वास,सवांददाता
मेरठ: आईआईएमटी इंजीनियरिंग काॅलेज में उन्नत भारत अभियान के अन्तर्गत “आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना में जैविक कृषि की भूमिका” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ आईआईएमटी समूह के चेयरमैन योगेश मोहन गुप्ता, मुख्य अतिथि पदमश्री  भारत भूषण त्यागी एवं उन्नत भारत अभियान आईआईटी, रूड़की के रीजनल काॅर्डिनेटर प्रोफेसर आशीष पाण्डे ने संयुक्त रूप से किया। अपने उद्घाटन सम्भाषण में आईआईएमटी ग्रुप के चेयरमैन योगेश मोहन गुप्ता ने जैविक कृषि की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में जैविक कृषि की परम्परा सनातन काल से ही रही है। उन्होंने अपने व्याख्यान में रामायण, महाभारत, ऋगवेद, कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उदाहरण देते हुए जैविक कृषि को समझाया। उन्होंने कहा आईआईएमटी ग्रुप जैविक कृषि के क्षेत्र में क्रियाशील है। अपने विशेष व्याख्यान में आईआईटी रूड़की के उन्नत भारत प्रकोष्ठ के रीजनल कार्डिनेटर प्रोफेसर आशीष पाण्डे ने उन्नत भारत अभियान के अन्तर्गत गाँवों को विकसित करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर विचार साझा किये। अपने अतिथि व्याख्यान में कार्यशाला के मुख्य अतिथि पदमश्री भारत भूषण त्यागी जी ने कहा जैविक कृषि भारतीय संस्कृति को परिभाषित करती है इसमें पंचतत्वों को दूषित किये बिना दीर्घकालीन और स्थिर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मिटटी एक जीवित माध्यम है जिसमें विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव उपस्थित रहते हैं जो प्राकृतिक रूप से खाद का निर्माण करते हैं। उन्होंने जैविक कृषि के लिये उपयोगी चार घटकों का विस्तृत वर्णन किया जिनमें शामिल हैं जैविक मानक, क्रियात्मकता, तकनीकी पैकेज व प्रभावी मार्केट। 
आईआईएमटी इंजीनियरिंग काॅलेज के डायरेक्टर डा. संजीव माहेश्वरी ने कहा भारत की स्थिति जैविक किसान की सारणी में प्रथम है व क्षेत्रफल के हिसाब से भारत नवें स्थान पर है। सिक्किम भारत का पहला जैविक राज्य है जिसमें पूर्ण रूप से जैविक कृषि को अपना लिया है। उन्नत भारत अभियान प्रकोष्ठ आईआईएमटी इंजीनियरिंग काॅलेज की काॅर्डिनेटर डा. शुभा द्विवेदी ने बताया कि कार्यशाला में देश-विदेश से जैसे कि ऐडो यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ घाना, यूनिवर्सिटी ऑफ नाइजीरिया, फेडरल यूनिवर्सिटी, आईआईटी रूड़की, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी इलाहाबाद, आईआईएमटी विश्वविद्यालय, फेडरल काॅलेज ऑफ एजूकेशन, सीसीएस विश्वविद्यालय, फेडरल काॅलेज ऑफ एनीमल हेल्थ, इबादान, इलोरिस विश्वविद्यालय नाइजीरियन स्टोर्ड प्राॅडक्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, नार्थ उड़ीसा विश्वविद्यालय, देवनागरी विश्वविद्यालय, पुणे विश्वविद्यालय आदि के करीब 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया। 
कार्यशाला को सफल बनाने में प्रोफेसर अमित गर्ग एवं आईआईटी रूड़की के उन्नत भारत अभियान के परियोजना सहायक नितिन वर्मा का विशेष योगदान रहा। 

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