उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म बड़ी ही भक्ति भाव के साथ मनाया

अलीगढ़ मंडल उत्तर प्रदेश के मंडल देश देश-दुनिया

अलीगढ़: पर्वराज पर्यषण के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म बड़ी ही भक्ति भाव के साथ मनाया गया। सुबह मंदिर में श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा व पूजा पाठ हुई, दोपहर को पाठ व श्री जी का अभिषेक हुआ व शाम को श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन खंडेलवाल मंदिर में आरती व उसके बाद भजन संध्या का आयोजन किया गया तथा मंदिर कमेटी के द्वारा बीच-बीच में धर्म से संबंधित प्रशन भी पूछे गए व उत्तर देने वाले व्यक्ति को पुरुस्कृत भी किया गया।
नरेश जैन ने विज्ञप्ति जारी कर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के बारे में बताया कि सभी जीव अपने अंतरंग में धारण करें, जो भी आयु में अपने से बड़ी स्त्रियाँ हैं,उन्हें माता के समान,अपने समान आयु की स्त्रियों को बहिन के समान तथा अपने से छोटी स्त्रियों को बेटी के समान देखना चाहिए तथा ब्रह्मचर्य का पालन कितना कठिन है,यह जीव युद्ध क्षेत्र में तो बाणों की वर्षा को सहन कर लेता है परंतु स्त्रियों के नैनों से होने वाली क्रूर बाण वर्षा को सहन नहीं कर पाता। ऐसा यह जीव इस अपवित्र शरीर में उसी प्रकार काम के वश होकर राग करता है, उसमें मग्न होता है, जिस प्रकार शमशान घाट में मृत शरीरों को कौए नोंच-नोंच कर खाते हैं।
तो वही मयंक जैन ने बताया कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म संसार में नारी के प्रति होने वाला राग विष (जहर) की बेल के समान है,जिसका त्याग तीर्थंकर मुनिराज जैसे महापुरुष भी करते हैं तथा ऐसे उत्तम ब्रह्मचर्य को धारण कर के द्यानतराय जी शिव (मुक्ति) महल में प्रवेश करने की भावना भाते हैं। इस प्रकार, उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का स्वरूप समझकर निश्चय ब्रह्मचर्य को प्रगट करने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि तभी बाहर से होने वाला ब्रह्मचर्य व्यवहार नाम पाता है और इसके लिए व्यवहारिक ब्रह्मचर्य तो होना ही चाहिए,उसके हुए बिना निश्चय ब्रह्मचर्य प्रगट नहीं होता। जिस प्रकार,‘राजा का महल’ कहलाने के लिए,राजा का उस महल में रहना जरूरी है। परन्तु राजा भी उसी महल में आकर रहेगा जो उसके योग्य बना होगा। परंतु बिना राजा के आये वह महल ‘राजा का महल’ नाम नहीं पाएगा। उसी प्रकार,निश्चय ब्रह्मचर्य वहीं प्रगट होगा,जहाँ पहले से व्यवहारिक ब्रह्मचर्य का पालन होता होगा तथा वह व्यवहार ब्रह्मचर्य नाम,निश्चय ब्रह्मचर्य प्रगट होने के बाद ही पाएगा,बिना उसके नहीं। इस प्रकार,ब्रह्मचर्य का स्वरूप समझ कर,ब्रह्म स्वरूप आत्मा में लीन होना ही दसलक्षण पर्व की सार्थकता है। इस दौरान कार्यक्रम में मुनेश जैन,सुरेश चंद जैन,राजकुमार जैन,नरेंद्र कुमार जैन,अखिलेश जैन,कैलाश चंद जैन,ओमप्रकाश जैन,सुरजीत जैन,सागर जैन,मनोज जैन,विजय जैन,विनोद कुमार जैन,शीनेश जैन,भारत जैन, संजय जैन, गौरव जैन,अदन जैन,सीमा जैन,ममता जैन,आरुषी जैन,आशा जैन,दीपिका जैन,पूनम जैन,आरती जैन आदि लोग मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *