लक्षणयुक्त शिशु को चिकित्सक के परामर्श से ही देनी है दवा की किट

आगरा मंडल उत्तर प्रदेश के मंडल देश देश-दुनिया
  • कोविड के लक्षण होने पर दी जाएगी मेडिसिन किट।
  • सावधानी अपनायें,शिशुओं को कोविड से बचाएं।
  • लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

आगरा: कोविड की संभावित तीसरी लहर का अधिक असर बच्चों पर पड़ने की संभावना के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग हर जरूरी प्रबंध करने में जुटा है। सरकार ने एहतियातन बच्चों के लिए दवा किट जारी की है। स्वास्थ्य विभाग इन दवा किट को कोविड के लक्षण वाले बच्चों में वितरित कराएगा।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.आरसी पांडेय

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.आर.सी पांडे ने बताया कि शून्य से 12 माह तक के शिशु,एक से पांच साल तक के बालक और 5 से 12 साल तक के बच्चों के लिए मेडिसिन किट विभाग की ओर से दी जाएगी। सीएमओ ने बताया कि जिन बच्चों में कोविड के लक्षण तो हैं लेकिन जांच नहीं हुई है या जांच की रिपोर्ट ज्ञात नहीं है और कोविड पॉजिटिव शिशु के लिए उपचार और मेडिकल किट की जानकारी से स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदीकृत किया गया है। सीएमओ ने बताया अगर किसी शिशु में कोविड के लक्षण दिखें तो चिकित्सक के परामर्श से ही दवा लेनी है। लक्षणों के हिसाब से अलग-अलग दवा किट दी जानी है और उसी हिसाब से खुराक तय की जानी है।
सीएमओ ने बताया कि अगर शिशु में लगातार 101 डिग्री से अधिक बुखार,अत्यधिक खांसी आना,पसली चलना,दूध एवं खुराक का लेना बंद कर देना,अत्यधिक रोना या निढाल पड़ जाना,पल्स ऑक्सीमीटर से नापने पर 94 फीसदी से कम का ऑक्सीजन स्तर आना परिलक्षित हो रहा है तो यह कोविड का लक्षण हो सकता है। ऐसे में तुरंत चिकित्सक की सहायता लेनी चाहिए। ऐसे बच्चों में कोविड प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
ऐसे करें कोविड प्रबंधन

  • दिन में तीन से चार बार बच्चे की श्वसन दर और ऑक्सीजन सेचुरेशन पल्स ऑक्सीमीटर से नापते रहें।
  • अगर बच्चे में खांसी, पसली चलने, दूध व खुराक बंद होने, तेज बुखार और दस्त न रुकने की समस्या हो तो तत्काल ए.एन.एम उपकेंद्र या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें।
  • किसी भी अप्रशिक्षित चिकित्सक के चक्कर में नहीं पड़ना है और न ही मेडिकल स्टोर से अपने मन से दवा खरीद कर देनी है।

यह नहीं करना है

  • छह माह तक के शिशुओं को किसी भी दशा में मल्टीविटामिन न दें।
  • कोई भी दवा चिकित्सक द्वारा बताए गये डोज से अधिक नहीं देना है।
  • बुखार का सिरप किसी भी स्थिति में बच्चे को खाली पेट नहीं देना है।

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