शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर नहीं हैं अधिकारी-सुलोचना मोर्या

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प्रदेशाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को समाधान के लिए भेजा पत्र 
लखनऊ: उत्तर प्रदेश महिला शिक्षा संघ की प्रदेशाध्यक्ष ने कहाकि शिक्षा विभाग में महिला शिक्षकों की समस्याओं को लेकर विभाग गंभीर नहीं है जिसके चलते महिला शिक्षक विभिन्न समस्याओं से जूझ रही हैं। अपनी समस्याओं को लेकर महिला शिक्षकों ने अधिकारियों के सामने अनगिनत बार गुहार भी लगाई है,लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी समस्याओं के हल के लिए गंभीरता नहीं दिखाता जिसको संघ ने गंभीरता से लिया है और महिला शिक्षकों की समस्याओं के हल के लिए आगे आया है ।
यह बात उत्तर प्रदेश महिला शिक्षा संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मोर्या  ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखें पत्र में कही। 
प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने बताया की बेसिक शिक्षा विभाग प्रदेश का कर्मचारियों की संख्या में सबसे बड़ा विभाग है, यह प्रदेश का एकमात्र ऐसा विभाग है जिसमें पुरुषों की अपेक्षा महिला कर्मियों की संख्या ज्यादा है इसके उपरांत भी महिला शिक्षकों की समस्याओं को लेकर विभाग अंधेरी करता है।
उन्होंने बताया कि आज महिला शिक्षक विभिन्न समस्याओं से जूझ रही हैं लेकिन विभाग के अधिकारी उनकी सुध तक नहीं ले रहे हैं उन्होंने महिला शिक्षकों की समस्याओं से अवगत कराते हुए बताया विभाग में महिला शिक्षकों को अवकाश आसानी से नहीं मिलता।
उन्होंने बताया कि मेडिकल अवकाश पर गई शिक्षिका यदि माह की 20 तारीख को कार्य भार ग्रहण नहीं करती है तो उसका वेतन रोक दिया जाता है। ऐसी स्थिति बीमारी में होती है जब उसे पैसे की ज्यादा आवश्यकता होती है। ऐसे में वेतन का रोक देना बिल्कुल भी उचित नहीं है। इस विषय पर विभाग के उच्च अधिकारियों को महिला शिक्षकों के हित में स्पष्ट गाइडलाइंस जारी करनी चाहिए। साथ ही भारत सरकार के द्वारा मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 2016 को प्रदेश में महिला कल्याण के लिए शीघ्र लागू किया जाए ताकि महिला शिक्षक कर्मियों को बच्चे के उपरांत भी 12 सप्ताह का अवकाश प्राप्त हो सके। उन्होंने कहाकि महिला शिक्षकों की यह समस्या अगर शीघ्र हल नहीं होती हैं,तो संघ प्रदेश स्तर पर आंदोलन करेगा और यह आंदोलन इन समस्याओं के हल होने तक जारी रहेगा जिसके लिए संघ ने अपनी सभी रूप रेखाएं तैयार कर ली है। इसलिए प्रदेश सरकार शीघ्र इन मांगों को पूरी करें।

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