विपरीत परिस्थिति में आर्य समाज का विशेष अभियान

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हापुड़: आर्य समाज हापुड़ की ओर से चल रहे पर्यावरण शुद्धि यज्ञ के पांचवे दिन नगर के लोगों ने उत्साह पूर्वक अपनी हवी प्रदान कर वायुमंडल को शुद्ध करने के लिए ऋषियों द्वारा बताएं यज्ञ मार्ग को अपनाकर वायुमंडल को विषाणु मुक्त किया।
आज यह यज्ञ यात्रा शक्ति नगर के सूरज प्रकाश के गृह निवास से प्रारंभ होकर कृष्णा नगर जे.के कॉलोनी से होते हुए कांति प्रसाद की धर्मशाला पर वार्ड नंबर:37 के सभासद नितिन पाराशर के गृह निवास पर यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। इस दौरान आर्य समाज के मंत्री अनुपम आर्य ने बताया यह यज्ञ यात्रा प्रतिदिन नगर के अलग-अलग स्थानों पर दोनों समय निकाली जा रही है। वहीं आर्य समाज के प्रधान नरेंद्र आर्य ने कहा वायुमंडल को शुद्ध करने का सबसे उत्तम उपाय यदि कोई है तो वह यज्ञ है और जिस परिवार में प्रतिदिन यज्ञ योग होता है वह परिवार सामान्यतः ही बीमारियों से बचा रहता है। अधिकतर उस परिवार के व्यक्ति स्वस्थ मिलते हैं। आर्यसमाज के पूर्व मंत्री आनंद आर्य ने सभी से अपने-अपने परिवार में या घर में यज्ञ करने की अपील की।
इस कार्यक्रम के आज के संयोजक ताराचन्द शास्त्री ने बताया कि यज्ञ एक वैज्ञानिक विधि है,जिस विधि को हमारे ऋषियों ने अनंत शोध करके इस विधि को हमें प्रदान किया किंतु समय के साथ-साथ हमने इस वैज्ञानिक विधि को छोड़ दिया,जिसके फलस्वरूप हम अपनी परंपराओं को भूलने लगे थे। ऐसे समय में आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती का प्रादुर्भाव हुआ और उन्होंने यज्ञ की परंपराओं को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य किया। वहीं यज्ञ के वैज्ञानिक महत्व को बताते हुए दैनिक दिव्य विश्वास के पत्रकार अदित्य उपाध्याय ने कहा कि हमारे वातावरण में अनगिनत अज्ञात सूक्ष्म जीवाणु हमारे चारों तरफ वातावरण में और हमारे रोमकूपों,रक्त और जोड़ों में रहते हैं। हवन द्वारा इन सभी का नाश होता है। तपेदिक,चेचक,मलेरिया आदि का इलाज हवन से संभव है। यज्ञ अथवा अग्निहोत्र आज केवल धार्मिक कर्मकांड तक ही सीमित नहीं रह गया है। यह शोध का विषय भी बन गया है।’अमेरिका’ में यज्ञ पर शोध हुए हैं और प्रायोगिक परीक्षणों से पाया गया है कि वृष्टि,जल एवं वायु की शुद्धि,पर्यावरण संतुलन एवं रोग निवारण में यज्ञ की अहम भूमिका है। अतः यज्ञ की महत्वता को ध्यान में रखकर हम आर्य समाज के माध्यम से गली-गली घर-घर में यज्ञ श्रृंखला का आयोजन कर रहे हैं।
इस दौरान धर्मेंद्र शास्त्री, आदित्य उपाध्याय (पत्रकार दिव्य विश्वास), विवेक शास्त्री, रामचरण, चंद्रपाल, दीपक, मनु गर्ग, संचित अग्रवाल, वेदमित्र आर्य, राधा, रमन आर्य, तुषार, अभय, सोनू आदि का विशेष सहयोग रहा।

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