समस्त पापों से मुक्त करती हैं मां गंगा:स्वामी पूर्णानंदपुरी

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अलीगढ़: पापनाशिनी,मोक्षप्रदायिनी एवं सरितश्रेष्ठा गंगा मैया भारत की ही नहीं वरन विश्व की परम पवित्र महानदी है। ऋग्वेद, अथर्ववेद,रामायण,महाभारत एवं अन्य धर्मग्रंथों में मोक्षप्रदायिनी गंगा मैया का यशोगान मिलता है। वैसे तो गंगा स्नान का अपना अलग ही महत्व है,लेकिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग लोक से शिवशंकर की जटाओं में पहुंची थी,इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। गंगा सप्तमी का पावन पर्व 19 मई बुधवार यानि आज है। गंगा सप्तमी के अवसर पर्व पर मां गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गंगा सप्तमी के विषय में यह जानकारी वैदिक ज्योतिष संस्थान के स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी महाराज ने दी।
स्वामी ने बताया कि मां गंगा की उत्पत्ति एवं पृथ्वी पर उनका आगमन भिन्न-भिन्न पर्वों के रूप में मनाया जाता है। वैशाख शुक्ल सप्तमी जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती और और ज्येष्ठ शुक्ल दशमी अर्थात जिस दिन गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई, गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है। गंगा नदी में स्नान करने से दस पापों का हरण होकर अंत में मुक्ति मिलती है। गंगा सप्तमी के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है,माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कई जन्मों के पुण्य के रूप में मनुष्य को प्राप्त होता है।
गंगा सप्तमी की पूजा विधि के बारे में महामण्डलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज ने बताया कि इस बार कोरोना महामारी के चलते पवित्र गंगा नदी में स्न्नान करना संभव नहीं है। ऐसे में आप घर में ही सूर्योदय से पूर्व स्नान के पानी में कुछ बूँदें गंगाजल की डालकर स्न्नान करते समय ‘ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः’ का स्मरण करने से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके बाद उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में गंगा मैया का ध्यान करते हुए पुष्प अर्पित कर दीपक प्रजवल्लित करके मां गंगा का स्तोत्र पाठ करें। गंगा सप्तमी के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद की सहायता अवश्य करनी चाहिए। उसके बाद गाय को भोजन अवश्य कराएं, क्योंकि गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शंकर की भी विधिवत पूजा एवं गंगा जल से अभिषेक करने पर शिव और गंगा मैया की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि गंगा मैया के पावन जल के छींटे मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप दूर हो जाते हैं। गंगा पूजन व स्नान करने से लौकिक व परलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है।

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