लॉकडाउन में कोरोना को दावत देते लोग, लगातार बढ़ रहे मामले, पुलिस प्रशासन हर मोर्च पर हुआ फेल

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अलीगढ़:  कोरोना के बढ़ते प्रकोप और प्रतिदिन होती मौतों के आंकड़े थमने का नाम नही ले रहे। एक ओर जनता घरों में कैद है तो दूसरी ओर कोरोना की जानलेवा रफ्तार दिन प्रतिदिन लोगों को अपने आगोश में लेने के लिये लालायित हो रही है। मामला यहीं सुधर जाये तो ठीक है। नही तो आने वाला वक्त तीसरी लहर के साथ और भी ज्यादा भयावह होता प्रतीत हो रहा है।
केन्द्र सरकार व राज्य सरकारें कोरोना महामारी को रोकने के कितने ही दावे क्यों ना करें। यह सब कागजी घोड़े हैं जो केवल फाइलों में दौड़ाने तक ही सीमित हैं। प्रदेश हो या जिला हो, शहर या कस्बा हो, हर जगह की तस्वीरें कुछ अलग ही बयां करती हुई प्रतीत होती हैं। ना कोई रोकटोक, ना कोई सख्ती, ना प्रशासन की चिंता और ना ही कोरोना का डर। जिसको जब जहां जाना हो निकल जाईये और तफरी लेकर लौट आईये। अगर इस दौरान कोरोना महामारी लग गई तो अपने साथ-साथ आस-पड़ोस के लोगों को भी चपेट में ले  लेगा।
जनाब हम किसी फिल्म या नाटक व कहानी की बात नही कर रहे हैं। हम हकीकत बयां कर रहे हैं। अलीगढ़ जिला प्रशासन की जो हकीकत को कितना भी छुपाना चाहता हो लेकिन पत्रकार की कलम और कैमरे की नजरों से कभी नही बच सकता। यह नजारा लॉकडाउन के उस समय का है जब योगी सरकार ने वीकेंड लॉकडाउन में दो दिन का और इजाफा करके सख्ती के साथ लागू तो कर दिया लेकिन ड्यूटी करने के लिये ऐसे पुलिस प्रशासन पर छोड़ दिया, जो किसी भी चौराहे पर केवल शाम के वक्त चालान काटने के लिये जिले में लगाई गई है। सुबह हो या दोपहर कहीं भी घूमते रहो आपको कोई भी रोकने-टोकने वाला नही होगा। हम पूछना चाहते हैं कि अगर महामारी फैल रही है,तो प्रशासन सख्ती क्यों नही दिखा रहा। क्या यह लापरवाही कोरोना को मात देने के लिये है या उसे विकराल रूप दिलाने के लिये शासन प्रशासन की ओर से खुला निमंत्रण दिया जा रहा है।

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