हाथरस: जिला पंचायत चुनाव में जेठानी ने देवरानी को दी मात,6628 वोट पाकर हासिल की जीत

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हाथरस जिला पंचायत चुनाव में जेठानी सीमा उपाध्याय ने देवरानी रितु उपाध्याय को जिला पंचायत चुनाव में सियासी पटकनी दी है। सीमा निर्दलीय प्रत्याशी थीं,जबकि रितु को भाजपा का समर्थन प्राप्त था।
हाथरस: जिला पंचायत चुनाव में कुछ मुकाबले बड़े ही रोचक हैं। क्योंकि ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि इन्हीं वार्डों से विजयी प्रत्याशी जिला पंचायत अध्यक्ष बनेगा। इसमें सबसे ज्यादा रोमांचक मुकाबला वार्ड नंबर 14 में रहा। यहां जेठानी सीमा उपाध्याय ने देवरानी रितु उपाध्याय को जिला पंचायत चुनाव में सियासी पटकनी दी है।
इसी बीच मुकाबले को कुछ और प्रत्याशियों ने भी रोचक बना दिया। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई थी है। निर्दलीय प्रत्याशी सीमा ने सभी प्रत्याशियों को मात देते हुए जीत हासिल की है। सबसे बड़ी बात तो यह रही कि भाजपा से समर्थित प्रत्याशी रितू उपाध्याय इस पूरे मुकाबले में 5वें स्थान पर आई हैं।
मतगणना शुरू होते ही स्थानीय लोगों की निगाहें सिर्फ इसी वार्ड में जेठानी और देवरानी की जीत पर बनी हुई थीं। वहीं पूरे मतगणना के समय सीमा शुरू से ही आगे रहीं और दूसरे स्थान पर निर्दली प्रत्याशी क्षमा शर्मा रही हैं। वहीं तीसरे स्थान पर बसपा प्रत्याशी मधु चौधरी और चौथे स्थान पर सपा प्रत्याशी रहीं। पाचवें स्थान पर भाजपा की प्रत्याशी देवरानी रितू उपाध्याय रही हैं। साथ में उपाध्याय परिवार की इस फूट का लाभ कई अन्य दमदार प्रत्याशीयों ने भी खूब उठाया। वहीं सभी प्रत्याशी अपनी जीत का समीकरण भी साध रहे थे।
जिले के कद्दावर नेता व सादाबाद विधायक रामवीर उपाध्याय के परिवार में जिला पंचायत चुनाव को लेकर कलह खुलकर सामने आई थी। रामवीर उपाध्याय की पत्नी और पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय जिला पंचायत के वार्ड नंबर 14 से सदस्य पद का निर्दलीय चुनाव लड़ी और 6628 वोटों से जीत भी हासिल की।
उनके सामने कोई और नहीं बल्कि उनकी देवरानी व पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय की पत्नी भाजपा से समर्थित रितु उपाध्याय थी। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के साथ-साथ मुकुल उपाध्याय की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी थी। सीमा उपाध्याय जहां निर्दलीय चुनाव मैदान में खड़ी थीं वहीं रितु को भाजपा का समर्थन प्राप्त था। इस मुकाबले को और रोचक बना दिया है निर्दलीय प्रत्याशी क्षमा शर्मा ने। क्षमा शर्मा के पति डा.अविन शर्मा लंबे समय से भाजपा की राजनीति कर रहे थे और इस बार से पार्टी का समर्थन पाने के लिए दावेदारी भी की थी लेकिन, भाजपा ने ऐन वक्त पर मुकुल की पत्नी को समर्थन दे दिया। ऐसे में क्षमा भी मैदान में कूद गई।
मुकाबला काफी रोचक भरा रहा इस सीट पर उनके पति व जिले के दिग्गज नेता रामवीर की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। वहीं अपने परिवार से बगावत कर चुनाव लड़ रहे मुकुल के सामने भी अपनी राजनीति साख बचाने की चुनौती थी। मुकुल की पत्नी नगर पालिका का चुनाव हार चुकी हैं और मुकुल भी कई चुनाव हार चुके हैं। ऐसा पहली बार हो हुआ है कि उपाध्याय परिवार के दो सदस्य आमने-सामने मैदान में है। इस मुकाबले को निर्दलीय प्रत्याशी क्षमा शर्मा ने भी रोमांचक बना दिया था। इनकी कोशिश है कि इस परिवार में हुई फुट को बना लिया जाए और विजयश्री प्राप्त कर ली जाए।

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