कोरोना संक्रमण पर लगाम कसने के लिए योगी सरकार का सख्त कदम, क्वारंटीन किए जाएंगे प्रवासी मजदूर

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लखनऊ: कोरोना के बेकाबू होते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। संक्रमण के मामलों पर लगाम कसने के लिए यूपी में अब जितने भी कामगर मजदूर दूसरे राज्यों से वापस लौटेंगे उन्हें पहले क्वारंटीन किया  जाएगा। डायरेक्ट वह अपने घर नहीं जा सकेंगे। सीएम योगी ने फैसला संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लिया है।
सभी प्रवासी कामगारों को क्वारंटीन करने के लिए राज्य सरकार ने 56 जिलों में केंन्द्र स्थापित  किए हैं। पहले मजदूरों का वहां पर टेस्ट किया जाएगा। उसके बाद जिन लोगों के पास क्वारंटीन होने की कोई सुविधा नहीं है, उन्हें दो हफ्ते के लिए इन सेंटरों पर क्वारंटीन किया जाएगा। ठीक इसी तरह से सरकार ने हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टॉप पर भी निगरानी बढ़ा दी है।
क्वारंटीन सेंटरों में रहेंगे प्रवासी मजदूर
यहां पहुंचने वाले लोगों की पहले कोरोना जांच की जाएगी, जिन लोगों में भी कोरोना के लक्षण होंगे उन्हें क्वारंटीन सेंटरों में रखा जाएगा। वहीं जिन लोगों के घरों में क्वारंटीन होने की सुविधा है,उन्हें घर में ही क्वारंटीन रहने की हिदायत दी जाएगी। यूपी सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक हरिद्वार कुंभ से राज्य में वापस लौटने वाले लोगों के लिए अलग से कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग करना बहुत ही जरूरी है। इसके साथ ही सभी को आइसोलेट किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग घर पर सुरक्षित तरीके से आईसोलेट हो सकते हैं उन्हें घर में ही रहने की सलाह दी जा रही है।
सभी जिलों में कोरोना टेस्ट की सुविधा
उन्होंने कहा कि सभी प्रवासी श्रमिकों को राज्य में वापस लौटते ही सबसे पहले आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाना होगा। सभी जिलों में इस टेस्ट की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में वापस लौटने वालों की पहचान ‘निगरानी समिति’ द्वारा की जाएगी और टेस्ट के बाद उन्हें आईसोलेट किया जाएगा।
14 दिनों तक आइसोलेशन में रहने के बाद प्रवासी मजदूरों को राज्य परिवहन निगम की बसों से उनके घर भेजा जाएगा। सीएम योगी ने अधिकारियों को उन प्रवासी मजदूरों की लिस्ट बानने के निर्देश जारी किए हैं। जिनको सरकार की तरफ से हर महीने 1 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जा सकती है। पिछले साल लॉकडाउन के समय पर भी प्रवासी कामगारों, स्ट्रीट वेंडरों, पेंशनरों को इसी तरह का भत्ता दिया था।

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