सरदार पटेल सुभारती लॉ कॉलिज में फैकल्टी डेवलपमेन्ट कार्यक्रम का समापन हुआ

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मेरठ : सरदार पटेल सुभारती लॉ कॉलिज, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ में आयोजित किये जा रहे फैकल्टी डेवलपमेन्ट कार्यक्रम सफलता पूर्वक समापन सत्र आयोजित किया गया। प्रोफेसर सुनील कुमार सिंह के समन्वय व सुभारती लॉ कॉलिज के डीन प्रो.(डा.) वैभव गोयल भारतीय के दिशा निर्देशन में यह कार्यक्रम निश्चित तौर पर शिक्षकों के शैक्षिक विकास में सहायक सिद्ध होगा।
समापन सत्र में सुभारती लॉ कॉलिज के डीन प्रो.(डा.) वैभव गोयल भारतीय शोध में नैतिकता विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए बताया कि उच्च शिक्षा में ईमानदारी औंर नैतिकता के बिना शोध सम्भव ही नही है। यदि इनके बिना कोई व्यक्ति कुछ भी प्रस्तुत करता है तो वहाँ साहित्यिक चोरी की सम्भावना प्रबल हो जाती है। उन्होनें शिक्षकों को लगातार शोध करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षक का जीवन बिना शोध के अधूरा है। उन्होनें फैकल्टी डेवलपमेन्ट कार्यक्रम की उपयोगिता की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से शोध कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलता है।
इस सत्र के अन्तिम चरण में फैकल्टी डेवलपमेन्ट कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुभारती लॉ कॉलिज के निदेशक राजेश चन्द्रा(पूर्व न्यायमूर्ति,प्रयागराज उच्च न्यायालय) ने इस कार्यक्रम के उद्देश्य पर सन्तुष्टि जताते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम शिक्षा,शिक्षक व शिक्षण के गुणवत्ता को उच्च मापदण्ड प्रदान करते है। उन्होनें कहा कि शिक्षकों के लिए भविष्य में ऐसे कार्यक्रम निरन्तर होते रहने चाहिए।
इस फैकल्टी डेवलपमेन्ट कार्यक्रम के समन्वयक प्रो.सुनील कुमार सिंह ने इस कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रथम सत्र में डा. सरताज अहमद नें कोविड-19 के सामाजिक औंर आर्थिक प्रभाव के बारे में चर्चा की,इसी सत्र में आफरीन आल्मास ने लैंगिक असमानता विषय पर बोलते हुए हमारे समाज में व्याप्त तमाम विसंगतियों औंर विचारधाराओं पर बात की। दूसरे सत्र में डा. प्रेम चन्द्र ने शिक्षण के सन्दर्भ में आधुनिक, शैक्षिक तकनीकों के बारे में उदाहरणों सहित व्याख्यान दिया। शैफाली गर्ग ने महिला मृत्यु दण्ड के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के सन्दर्भ में बहुचर्चित “शबनम बनाम उ.प्र. राज्य” का उदाहरण देकर मृत्यु दण्ड के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। तीसरे सत्र में सुशासन यानि गुड गवर्नेंस विषय पर डा.मनोज कुमार त्रिपाठी नें अपने विचार रखें औंर इसके अन्तर्गत वांछित परिणाम पाने के लिए कई उपाय भी सुझायें। उन्होनें आधुनिक शासन में लगातार बदलती हुई परिस्थितियों में ई-गवर्नेंस की आवश्यकता पर जोर दिया। इसी सत्र में विकास त्यागी ने इतिहास में सबाल्टर्न अध्ययन विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि समाज में उपेक्षित,वंचित और हाशिये पर चले गये वर्गों या व्यक्तियों के योगदान को इतिहास में सही स्थान देने की आवश्यकता है। अगले सत्र में डा.रीना बिश्नोई ने “संशोधित उपभोक्ता कानून” की महत्ता को दर्शाते हुए कानून के महत्वपूर्ण प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया कि आज उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति ज्यादा जागरूक औंर सक्षम हुआ है। आज के उपभोक्ता के पास सूचना के अधिकारों के साथ–साथ न्याय पाने का सरल और आसान सर्वसुलभ तंत्र है। शालिनी गोयल ने वर्तमान में स्वास्थय सम्बन्धी विभिन्न कानूनों की उपयोगिता को दर्शाते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के समय विभिन्न चुनौतियाँ हमारे सामने आयी और हम सबने महसूस किया कि स्वास्थय सम्बन्धित कानून पर्याप्त नही हैं। डा.सारिका त्यागी ने वर्तमान में हिन्दू विधि में महिलाओ के सम्पत्ति अधिकारों के संशोधित प्रावधानों के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि आज की महिला सम्पदा के अधिकारों के मामले में ज्यादा सक्षम हुई है। अजन्मे शिशु के विधिक आधिकारों के विषय में एना सिसोदिया ने विभिन्न कानूनों के बारे में जानकारी दी।
समापन सत्र में समन्वयक प्रो.सुनील कुमार सिंह ने व्यापार,वाणिज्य और समागम की स्वतन्त्रता से सम्बन्धित सैंवधानिक प्रावधानों की विवेचना की और उनके निर्वचन में आये आधारभूत परिवर्तनों के विषय में जानकारी दी। कार्यक्रम के अन्त में डा.मनोज कुमार त्रिपाठी ने कार्यक्रम की सफलता में सभी के योगदान को रेखांकित करते हुए सभी शिक्षकों व गैर शिक्षक कर्मचारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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