मातृभाषा हिंदी तथा नई शिक्षा नीति’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया

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मेरठ : मातृभाषा हिंदी तथा नई शिक्षा नीति विषय पर गोष्ठी एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता,आशुभाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। निबंध लेखन प्रतियोगिता तथा आशुभाषण प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय परिसर के कई विभागों से छात्र-छात्राओं ने प्रतिभागिता की। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में “मातृभाषा हिंदी तथा नई शिक्षा नीति” विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का संचालन जूम ऐप एवं फेसबुक पर भी किया गया।
गोष्ठी में स्वागत भाषण में प्रो.नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय मातृभाषा में शिक्षण कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए अग्रसर है। नई शिक्षा नीति के क्रम में हम भविष्य में अपनी मातृभाषा मे शिक्षा प्राप्त करें और अन्य भाषाओं में शिक्षा प्राप्त करने की मजबूरी हमारी नहीं रहेगी। इस संगोष्ठी से क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के प्रचार प्रसार और महत्व बढेगा। हमारे शासन स्तर पर हमारे प्रधान मंत्री मातृभाषा के संदर्भ में प्रशंसा के पात्र हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, प्रदेशीय स्तर पर और विश्वविद्यालिय स्तर पर नई शिक्षा नीति के संदर्भ में प्रयास हो रहे हैं। यह संगोष्ठी उन प्रयासों को आगे बढाने और विद्वानों तक पहुंचाने का प्रयास है। आज के संदर्भों में हमें बहुभाषीय होना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.विनोद मिश्र, महासचिव,अंतरराष्ट्रीय हिंदी सचिवालय,माॅरीशस ने कहा कि भारत मातृभाषाओं का देश है। मातृभाषा राष्ट्रीय भाषा से आगे विश्व भाषा बनती है। हिंदी दुनिया की प्रथम पांच समृद्ध भाषाओं में से एक है। भारत के नीति नियंताओं की प्राथमिकता हिंदी होनी चाहिए। मातृभाषा में शिक्षण के अभाव मे बौद्धिक विकास की बात करना अस्वभाविक है। हिंदी जन मन के भीतर विस्तार पाती है। भाषा सिर्फ रोजगार की भाषा बनकर न बढे़ बल्कि संस्कृति की भाषा बने और उसमें सृजनशीलता का विकास हो। भविष्य में विश्व व्यापार में हमारी महत्ता बढ़ेगी। उसी संदर्भ में हमारी जनभाषाएं हमें सशक्त रूप प्रदान करेंगी। हिंदी ने अनेक क्षेत्रों में अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है। 1905 में लोकमान्य तिलक ने जिस हिंदी की बात की। राष्ट्रीय स्तर पर स्वतन्त्रता आंदोलन में महात्मा गांधी ने और वर्तमान में भारत सरकार ने हिंदी के महत्व को स्वीकार किया है। हमारी भाषा संधि और विनम्रता की भाषा है। हिंदी रचना और विमर्श दोनों स्तर पर मजबूत भाषा है। तकनीक के वर्तमान समय में अनेक प्रौद्योगिकी संस्थानों ने हिंदी के महत्व को समझा है।
प्रो.वाई.विमला,प्रतिकुलपति ने कहा कि हमारे देश में अनेक मातृभाषाएं हैं। क्षेत्रीय बोलियों को भी हम मातृभाषा के रूप में समझते हैं। मातृभाषा माता के समान होती है। निजी रूप में हिंदी ही मेरी मातृभाषा है क्योंकि मेरा जन्म इसी भूमि पर हुआ है। उत्तर भारत और मध्य भारत में हिंदी बोली जाती है जबकि भारत के तमाम प्रांतों में हिंदी समझी जाती है।
कार्यक्रम के तीसरे सत्र में आशुभाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया साथ ही निबंध प्रतियोगिता और आशुभाषण प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गये।
कार्यक्रम के संयोजक प्रो.नवीन चन्द्र लोहनी, संकायाध्यक्ष कला एवं अध्यक्ष हिंदी विभाग ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। सत्रों का संचालन डा.विद्यासागर सिंह,डा.अंजू,डा.आरती राणा तथा डा.यज्ञेश कुमार ने किया। कार्यक्रम में डा .कवि नवीन,शौर्य सिंह,कीर्ति चौधरी,विशाल चौधरी,लक्ष्य राठी,प्रियंका कुशवाहा,शाहवेज,इल्मा,भवित धवलिया,रेशमा आदि उपस्थिति रहे।

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