विश्व अब भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूती और दृढ़ता की खुलकर सराहना कर रहा हैः पीएम मोदी

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  • प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट प्रावधानें को प्रभावी तरीके से लागू करने पर वेबिनार को संबोधित किया
  • सरकार स्वस्थ भारत की दिशा में चौतरफा रणनीति पर काम कर रही हैः प्रधानमंत्री
  • भारत को दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन के लिए कच्चे माल का आयात कम करना चाहिएः प्रधानमंत्री

नई दिल्ली,(एजेंसी): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने के बारे में आयोजित वेबिनार को संबोधित किया।प्रधानमंत्री ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र का आवंटन अप्रत्याशित है और इससे प्रत्येक नागिरक को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का सरकार का संकल्प दिखता है। मोदी ने कहा कि पिछला वर्ष महामारी के कारण काफी कठिन और चुनौतीपूर्ण था।उन्होंने चुनौती पर काबू पाए जाने और अनेक लोगों की जान बचाए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसका श्रेय सरकार तथा निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों को दिया। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कुछ महीनों के अंदर ही देश ने 2500 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क स्थापित किया और इस तरह कुछ दर्जनभर जांचों की तुलना में जांच कार्य 21 करोड़ पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि हमें मेडिकल उपकरण से लेकर दवाइओं, वेंटिलेटर से लेकर वैक्सीन, वैज्ञानिक अनुसंधान से लेकर निगरानी संरचना, डॉक्टरों से लेकर महामारी विज्ञानियों सब पर फोकस करना होगा ताकि भविष्य मेंदेश किसी स्वास्थ्य आपदा से निपटने में बेहतर रूप से तैयार हो।
प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ्य भारत योजना के पीछे यह प्रेरणा है। इस योजना के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है कि देश में ही अनुसंधान से लेकर जांच और इलाज तक एक आधुनिक ईकोसिस्टम विकसित किया जाएगा।यह योजना प्रत्येक क्षेत्र में हमारी क्षमताओं को बढ़ाएगी।
पीएम मोदी ने कहा कि विश्व आज भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूती और दृढ़ता की खुलकर प्रशंसा कर रहा है। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र ने अपने अनुभव और योग्यता को दिखाया है। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रति सम्मान और भरोसा कई गुना बढ़ गया है और इसको ध्यान में रखते हुए देश को भविष्य की दिशा में काम करना चाहिए।उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में भारतीय डॉक्टरों, भारतीय नर्सों, भारतीय पारामेडिकल स्टाफ, भारतीय दवाओं तथा भारतीय टीकों की मांग बढ़ेगी।उन्होंने कहा कि विश्व का ध्यान निश्चित रूप से भारत की मेडिकल शिक्षा प्रणाली पर जाएगा और बड़ी संख्या में विदेशी विद्यार्थी भारत में चिकित्सा अध्ययन करने आएंगे।
प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान आयुष क्षेत्र के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने तथा वैज्ञानिक अनुसांन बढ़ाने में आयुष संरचना ने काफी सहायता दी है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए टीकों के साथ पारंपरिक दवाइयों और मसालों के प्रभाव का अनुभव विश्व करने लगा है। उन्होंने घोषणा कि डब्ल्यूएचओ भारत में पारंपरिक औषधि के वैश्विक केंद्र स्थापित करने जा रहा है।
इसके अंतर्गत देश में दवाओं तथा चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन से जुड़ा प्रोत्साहन दिया जाता है। इसी तरह दवाओँ और चिकित्सा उपकरणों के लिए मेगा पार्क बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश को आरोग्य केंद्रों, जिला अस्पतालों, क्रिटिकल केयर इकाइयों, स्वास्थ्य निगरानी संरचना, आधुनिक प्रयोगशालाओं और टेलीमेडिसिन की जरूरत है। उन्होंने प्रत्येक स्तर पर कार्य और प्रत्येक स्तर पर प्रोत्साहन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के लोगों, चाहे गरीब से गरीब हो या दूरदराज के इलाकों में रह रहे हों, सबको श्रेष्ठ संभव इलाज मिल सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा देश के स्थानीय निकायों को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं का नेटवर्क बनाने और पीएमजेएवाई में सहयोग के लिए पीपीपी मॉडल को समर्थन दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन, नागरिकों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तथा अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी में साझेदारी की जा सकती है।

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