चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में बार काउंसिल लीगल एजुकेशन विषय नियमावली 2020 पर हुई गोष्ठी

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दिव्य विश्वास,संवाददाता
मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर, मेरठ के मूट कोर्ट हाल में संस्थान के समस्त छात्र-छात्राओं एवं समस्त शिक्षकों के मध्य संगोष्ठी की गयी जिसका विषय बार काउंसिल लीगल एजुकेशन नियमावली 2020 था। जिसमें छात्रों की ओर से सर्वप्रथम बी.ए.एल-एल.बी. प्रथम वर्ष की छात्रा नेन्सी शर्मा के द्वारा विचार व्यक्त किये गये । उनका कहना है कि छात्र एवं छात्राओं को प्रायौगिक ज्ञान भी होना चाहिए और इसके लिये उन्हें जनपद न्यायालय, उच्च न्यायालय में जाना चाहिए। इसके पश्चात कामनी त्यागी, बी.ए.एल-एल.बी. प्रथम वर्ष की छात्रा द्वारा प्रतिभाग किया तथा उनका कहना था कि विधि अध्ययन के दौरान ही न्यायालयों एवं अन्य सम्बन्धित विभागों में दी जाने वाली इंटर्नशिप को बढ़ावा देते हुये इसको आवश्यक किया जाना चाहिए। यश गुप्ता, बी.ए.एल-एल.बी. प्रथम वर्ष का कहना है कि प्रायौगिक परीक्षा का ज्ञान आवश्यक है। इसके पश्चात सैय्यदा बी.ए.एल-एल.बी. प्रथम वर्ष की छात्रा के द्वारा कहा गया कि अनुभव की आवश्यकता को पढ़ाई के दौरान ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। प्रेरणा, बी.ए.एल-एल.बी. प्रथम वर्ष की छात्रा का भी यही मानना है तथा रजत चौधरी, बी.ए.एल-एल.बी. प्रथम वर्ष का कहना है कि प्रशिक्षण का कार्य भी पढ़ाई के दौराना होना चाहिए। सुमित प्रकाश, बी.ए.एल-एल.बी. द्वितीय वर्ष के छात्र का मानना है कि न्यायालय में देरी का कारण प्रशिक्षण का अभाव है। अनुभव पंवार, बी.ए.एल-एल.बी. द्वितीय वर्ष का मानना है कि एल-एल.एम. एक वर्ष के स्थान पर दो वर्ष पर्याप्त है। नेहा एल-एल.एम. द्वितीय वर्ष की छात्रा ने कामन एन्ट्रेंस को एल-एल.एम. को अच्छा साबित होना बताया है।
अन्त में विभाग के समन्वयक डा. विवेक कुमार द्वारा सभी छात्र-छात्राओं को धन्यवाद ज्ञापित करते हुये कहा कि बार काउंसिल लीगल एजुकेशन  नियमावली 2020 भारतीय विधि शिक्षा को विश्व स्तरीय बनाने की ओर एक सकारात्मक प्रयास है।

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